Tuesday, April 25, 2017

Just for FB (2017)



25-Apr-2017

MCD चुनाव की गरमागर्मी के बीच दिल्ली में मौसम ने बदला रूख...
कल जो होगा देखा जाएगा... अभी लेलो बारिश के सुख...

Monday, April 24, 2017

बेटी तो सदा से पराई थी

सास-ससुर के लिए जो भी करती रही...वो सब उसका फ़र्ज़ था...
माँ-बाबा के लिए ज़रा कुछ कर बैठी...वो उनपर उसका क़र्ज़ था...
 
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पागल थे या दीवाने वो... बेटी होने पर ख़ुशियाँ उन्होंने मनाई थी...
आया वक्त जब फ़र्ज़ निभाने का... बोले बेटी तो सदा से पराई थी..

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बहु को कुछ भी कहने का जिस घर में सास-ससुर को अधिकार था...
उस घर के बेटे को सास का कहना "ध्यान रखना बीवी-बच्चों का" नागवार था...

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जो कल झूठे वादों पर घर अपने नयी दुल्हन लाए थे...
बहु का दर्जा भी दे ना सके, जाने क्या-क्या कहके आए थे...
वो बेटी कल अपने घर की विदा जब करवाएँगे...
'ख़ुश रखना उसको सदा" किस मुँह से कह पायेंगे...


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'बेटा' कह जब उसकी माँ उसके पति को बुलाती थी...
मन की एक बात जुबां तक वो लाने से कतराती थी...
" 'बेटा' कह कर मुझको माँ तुमने जीवन भर पुकारा था...
मैं गर हो गयी परायी... तो ये कैसे आज तुम्हारा था...
सास के मुँह से 'बेटी' सुनने को माँ कान मेरे तरस गए...
मैं 'मम्मी' उनको कहती रही अब तो कितने ही बरस गए...
क्यों तुमने शुरू से सिखाया नहीं बेटी तेरी यही कहानी है..
आज है हमारी... कल किसी और की हो जानी है...
बेटा तू है इस घर का ..जब तक न आयी तुझे जवानी है...
दूजे घर की बन जाए जब, बात ये मन से बिसरानी है...
मैंने आज बतायी जो, कल बेटी को अपनी तूने ये बात सिखानी है...

और कल मेरी आँख से था बहता जो आज तेरी आँख में पानी है..."

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Friday, December 16, 2016

My 2016 one liners

Excuse
Life's nothing but an excuse to cover the journey till death .

Humanity
We all are born human, then we are made to learn how inhuman the world is and forget humanity.

Training 
All humans are born the same, it's us who train them for the better or the worse.

Fear
Fear of falling is the only one we bring from womb, all others are instilled in our mind by those who love us.

Networking
Networking between living is more important thaṅ that between the non-living; for it's the living that shall remember you when you become non-living.

Irony
The same people to whom a child runs to when s/he feels fear, anxiety, pain, need for anything are the last ones s/he wants to learn of the same emotions as an adult..

Being Straightforward 
Something people proudly share as their weakness in professional interviews and use as an excuse to speak their true mind; but something they cannot appreciate about others.


Thursday, July 18, 2013

बदल गया सब

बदल गया सब, अब कुछ भी तो नहीं पहले जैसा,
जब प्यार भी बसता था दिलों में, सब कुछ नहीं था पैसा |
ना परिस्थितियाँ हैं वैसी ना ही वैसे हालात हैं,
ना इंसानियत रही वैसी ना ही वैसे जस्बात है|
ना ही मन में धीरज ना ही दिमाग में सुकून है,
कुछ डरा, सहमा, ज़ख़्मी दिखता जीने का जूनून है|
कैसा है ये खौफ, किस तरह का ये मौन है,
जिंदगी तो है वही, पर ये जीने वाला कौन है|

Wednesday, October 24, 2012

कुछ तो बात थी मेरे गाँव में



हर दिन बदलती ज़िन्दगी की दौड़ में, 
पल-पल बिगड़ती परिस्थितियों के दौर में...
आकाश की उचाईयों को छूने की आस में,
हर बार जीत पाने की अबूझ-सी प्यास में...
अपनों से मीलों दूर...यहाँ है बस परछाई साथ में,
निकलता हूँ घर से जब, लिए कुछ लकीरें हाथ में...
सोचता हूँ, समझता हूँ, चाहता हूँ, पा लूं हर मंज़िल,
फिर कभी, कहीं, जाने क्यूँ अनायास ही, कह उठता है दिल...
रोटी, कपड़ा, गाड़ी, मकान सब तो हैं तेरे पास में,
और कितनी चाहते लिए घूमता है, छोटे से अपने 'काश' में...
बचपन में जो ख़ुशी पाता था तू, लिए बस एक रुपया हाथ में,
क्यूँ लाखों करोड़ो भी नहीं दे पाते वो सुख आज के हालत में... 
तलाशता है क्या इमारतों की भीड़ और मशीनों के शोर में,
सब कुछ है तेरे पास, फिर क्यूँ उमंग नहीं आजकल की भोर में...
फिर सोचता हूँ...न शहरों की चमक-धमक में, न जंगल उजाड़ में, 
यहाँ कुछ भी तो वैसा नहीं, था जैसा मेरे पहाड़ में...
न अपने हैं, न अपनों-सा एहसास है, 
न ही सुख-दुःख की साझेदारी, न आपसी विश्वास है... 
न रिश्ते, न त्यौहार, न ही मेल-मिलाप है, 
शायद इसीलिए मन में मेरे, अब भी पहाड़ की अमिट-सी छाप है... 
वहाँ न गाड़ी थी, न सड़क थी और न ही इम्पोर्टेड जूते थे पाँव में,
पर फिर भी कुछ तो बात थी मेरे गाँव में...

Dedicated to Sanjupahari :)